Breaking News
उत्तराखंड के प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. यशवंत सिंह कठोच पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित 
दांत दर्द और मुंह की बदबू से हैं परेशान, तो हो सकती है शरीर में इन विटामिंस की कमी
ऑर्डिनेटर राजीव महर्षि के नेतृत्व में कांग्रेसी नेताओं ने लिया ईवीएम की सुरक्षा का जायजा
मोदी सरकार ने जनजातीय समाज को देश की मुख्यधारा से जोड़ा- महाराज
पर्यावरण संरक्षण आज के समय की बड़ी जरुरत
मुख्य सचिव ने केदारनाथ धाम के कार्यों का लिया जायजा
जोमैटो से खाना मंगाना हुआ महंगा, जानिए कितना प्रतिशत बढ़ा चार्ज
लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने एक और लिस्ट की जारी, जानें- किसे कहां से दिया टिकट
आईपीएल 2024 के 38वें मैच में आज राजस्थान रॉयल्स से भिड़ेगी मुंबई इंडियंस

अचानक से बहुत ज्यादा ठंड लगना नॉर्मल नहीं, हो सकता है इस बीमारी का लक्षण

अगर अचानक से बहुत ज्यादा ठंड लगने लगे तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह हाइपोथर्मिया का लक्षण भी हो सकता है। यह एक इमरजेंसी मेडिकल कंडीशन होती है. जब शरीर का तापमान अचानक से गिरने लगता है और शरीर ठंडा पडऩे लगता है तब यह समस्या होती है। इस स्थिति में बॉडी टेंपरेचर 95 फॉरेनहाइट के नीचे चला जाता है. मायोक्लोनिक की रिपोर्ट के अनुसार, शरीर का सामान्य से ज्यादा तापमान गिरना कई अंगों के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इससे हार्ट और नर्वस सिस्टम सही तरह काम नहीं कर पाते हैं।

अगर सही समय पर हाइपोथर्मिया  का इलाज न हो तो हार्ट फेल होने और जान जाने का जोखिम हो सकता है. इस बीमारी का सबसे ज्यादा खतरा ठंडे मौसम में रहता है। आइए जानते हैं इसके लक्षण और बचाव के बारें में…

हाइपोथर्मिया क्या होता है
हाइपोथर्मिया शरीर के तापमान को कम होने की कंडीशन है। दरअसल, हमारे शरीर का एक सामान्य होता है, जो उम्र, लिंग और हेल्थ कंडीशन पर निर्भर करता है. शरीर का सामान्य तापमान 98.6 डिग्री फारेनहाइट से 100.4 डिग्री फारेनहाइट तक माना जाता है. इस तापमान को कुछ हार्मोन कंट्रोल करते हैं लेकिन जब शरीर का तापमान सामान्य से कम होने लगता है तो ऐसी स्थिति हाइपोथर्मिया कहलाती है।

हाइपोथर्मिया के क्या लक्षण हैं
* बहुत ज्यादा कंपन और थकान
* सांस लेने में दिक्कत
* बोलने में परेशानी होना
* मानसिक क्षमता प्रभावित होना
* याददाश्त कमजोर होने लगना
* हाथ-पैरों में सुन्नपन महसूस होना

हाइपोथर्मिया से किन लोगों को ज्यादा खतरा
हाइपोथर्मिया एक ऐसी कंडीशन है जो किसी को भी हो सकती है लेकिन नवजात शिशु, बढ़ती उम्र या किसी हार्मोनल समस्या के मरीज को इससे सबसे ज्यादा खतरा होता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इन लोगों में सामान्य शारीरिक तापमान बनाए रखने की क्षमता बेहद कम होती है. अगर कोई डिप्रेशन और साइकोटिक दवाईयों का सेवन कर रहा है तो उनमें यह समस्या देखने को मिल सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top