Saturday, January 28, 2023
Home ब्लॉग जोशीमठ आपदा : सार्थक हल निकलने की उम्मीद

जोशीमठ आपदा : सार्थक हल निकलने की उम्मीद

डॉ. आर.के. सिन्हा
देवभूमि के जोशीमठ में तेजी से जमीन धंसने की खबरों को देख-सुनकर सारे देश का चिंतित होना स्वाभाविक है।
जोशीमठ में अफरा-तफरी का माहौल है। दरारों से भरी हुई सडक़ें और मकान भय और आतंक, दोनों उत्पन्न करते हैं। इस समय सारा देश जोशीमठ और उत्तराखंड की जनता के साथ खड़ा दिख रहा है। जोशीमठ शहर पर जमीन में समाने का खतरा लगातार बढ़ता ही चला जा रहा है। इस पूरे क्षेत्र को ‘सिंकिंग जोन’ करार दिया गया है। तेजी से बदलते हालात की वजह से आपदा प्रभावित इलाकों में रहने वाले हजारों परिवारों को पुनर्वास केंद्रों में ले जाया जा रहा है।
अब जोशीमठ में ताजा स्थिति के लिए पर्यटन, अवैध निर्माण और सुरंगों और बांधों का निर्माण बताया जा रहा है। कहने वाले तो यह भी कह रहे हैं कि अनियंत्रित भवन निर्माण को देख भूकंप भी जोशीमठ को घूर रहा है। इसलिए जोशीमठ का अस्तित्व खत्म होता नजर आ रहा है। वहां पर जमीन के अंदर भारी भरकम सुरंग तो खोद दिए गए, लेकिन राज्य के पर्यावरण की अनदेखी की गई। जोशीमठ में भयावह स्थिति के चलते स्थानीय जनता की आंखों में सिर्फ  आंसू के अलावा कुछ नहीं है। जीवन भर की कमाई से मकान बनाने वालों को अपनी आंखों के सामने उनको जमींदोज होता देखना पड़ रहा है। जोशीमठ ग्लेशियर के मलबे पर बसा शहर है, जिसकी जमीन बहुत मजबूत नहीं है। इस बात का उल्लेख 50 साल पहले की एक रिपोर्ट में किया भी गया था। इस रिपोर्ट में अनियोजित विकास के खतरों को रेखांकित करते हुए चेतावनी दी गई थी कि जोशीमठ में छेडख़ानी के परिणाम भारी पड़ सकते हैं। रिपोर्ट में जड़ से जुड़ी चट्टानों, पत्थरों को बिल्कुल भी न छेडऩे के लिए कहा गया था। वहीं यहां हो रहे निर्माण को भी सीमित दायरे में समेटने की सलाह की गई थी। पर इन सिफारिशों को अनदेखा किया गया। इसके बाद और अध्ययनों में भी ऐसी ही बातें सामने आई कि इस पहाड़ी इलाके में विकास के नाम पर चल रही बड़ी परियोजनाएं आखिरकार, तबाही का कारण बन सकती हैं।

उत्तराखंड को देवभूमि कहते हुए यहां धार्मिंक गतिविधियों को बढ़ाने की योजनाएं बनाई गई। धार्मिंक और प्राकृतिक पर्यटन बढ़ाकर आर्थिक समृद्धि के सपने दिखाए गए। लेकिन, यह सब किस कीमत पर हासिल होगा,  लगता है कि इस पर विचार नहीं किया गया। जोशीमठ प्राचीन शहर है। यहां 8वीं सदी में धर्मसुधारक आदि शंकराचार्य का प्रवास हुआ। फिलहाल चर्चा है कि वर्तमान संकट के लिए एनटीपीसी द्वारा बनाए जा रहे बिजलीघर के अंडरग्राउंड टनल के निर्माण लिए विस्फोटकों का प्रयोग, जलविद्युत परियोजना के लिए अंधाधुंध खुदाई तथा नेशनल हाईवे बनाने के लिए अनियमित ढंग से जंगलों की कटाई है। देखिए, जो चौड़ी दरारें बद्रीनाथ में पड़ चुकी हैं, जिनकी वजह से सडक़ें और इमारतें धंसती जा रही हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि अब बद्रीनाथ को बचाने के लिए भी भागीरथी प्रयास करने होंगे। भारत ऐसा देश है, जहां नौ महीने से अधिक समय तक सूर्य रहता है। जब हमारे पास अनगिनत सौर ऊर्जा परियोजनाएं हो सकती हैं, तो जलविद्युत परियोजना की जरूरत ही क्यों है?

हमें इस तरफ भी विचार करना होगा। जोशीमठ से बाहर रहने वाले लोग शायद वहां के लोगों का दर्द महसूस नहीं कर सकते। कैसी विडम्बना है, जब जलविद्युत परियोजनाएं बनती हैं, तब ग्रामीणों के पुनर्वास के लिए बहुत सारे वादे किए जाते हैं, लेकिन होता कुछ भी नहीं है। इस तबाही के लिए कौन जिम्मेदार है? अब इस दुर्घटना की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और पुनर्वास के साथ भारी भरकम मुआवजा भी दिया जाना चाहिए।

यह याद रखना होगा कि प्रकृति का अपना स्वयं का स्वतंत्र धर्म एवं नियम है। प्रकृति से खिलवाड़ एवं उसका अतिक्रमण मनुष्य को बहुत ही भारी पडऩे वाला है। और यह सब मनुष्य को अपने आप को छद्म धार्मिंक साबित करने के चलते हो रहा है  सदियों से जोशीमठ अस्तित्व में है, लेकिन पिछले कुछ वर्षो तक वहां इतनी भीड़भाड़ नहीं थी। जब से समाज में पाखंड दिखावे और ढोंग का बोलबाला हुआ है, तब से कमोबेश सभी धार्मिंक स्थलों का यही हाल है। दस साल पहले जून, 2013 में उत्तराखंड के केदारनाथ में भयंकर तबाही हुई थी। भयंकर बारिश और मंदाकिनी नदी में उफान ने हजारों जिंदगियां लील ली थीं, सैकड़ों घर तबाह हो गए थे।

इस आपदा को प्राकृतिक कहा गया, लेकिन, असल में यह प्रकृति से अधिक मानव-निर्मिंत आपदा थी। बारिश, गर्मी और सर्दी ऋतु चक्र का हिस्सा हैं। भूगर्भ शास्त्री कहते हैं कि धरती के नीचे तरह-तरह के परिवर्तन होते रहते हैं, इसलिए धरती कभी कांपती है, कभी उसके नीचे की सतहें एक जगह से दूसरी जगह सरकती हैं। ये सारी व्यवस्थाएं इसलिए हैं ताकि धरती का अस्तित्व बना रहे। पेड़, पौधे, कीड़े-मकौड़े, जानवर सब इस व्यवस्था के हिसाब से चलते हैं। लेकिन इंसान ने अपनी बुद्धि के घमंड में इस व्यवस्था को चुनौती देनी शुरू कर दी। जिन जगहों पर पहाड़ों को होना था, जहां जंगलों का विस्तार होना था, जहां नदियों को बहने के लिए निर्बाध जगह चाहिए, जहां बारिश के पानी को समाने के लिए स्थान चाहिए, उन सारी जगहों पर इंसान ने अपना कब्जा जमाना शुरू कर दिया, लेकिन जब उसके कब्जे को प्रकृति का नुकसान पहुंचा, तो उसे प्राकृतिक आपदा का नाम दे दिया गया। यह नाम देने की सुविधापूर्ण चालाकी ही फिर से भारी पड़ती दिखाई दे रही है। क्या केदारनाथ संकट से कोई सबक न लेने का नतीजा है, जोशीमठ का धंसना?

जोशीमठ में हालात की गंभीरता को देखते हुए अब एनटीपीसी की तपोवन-विष्णुगढ़ जलविद्युत परियोजना और मारवाड़ी-हेलंग बाईपास मोटर मार्ग को अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। संकट और दहशत के बीच लोग लगातार सरकार से ध्यान देने की मांग कर रहे थे। अब सारे मामले को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं देख रहे हैं। अब एक उम्मीद बंधी है कि जोशीमठ संकट का सार्थक हल निकलेगा। वहां की परेशान जनता के साथ तो सारा देश और सरकार खड़ी हैं ही।

RELATED ARTICLES

तो कैसे होगा मुक्त व्यापार

भारत की अपेक्षा है कि समझौता होने पर भारतीय नागरिकों के लिए ब्रिटेन जाना आसान हो जाएगा। लेकिन ब्रिटेन ने साफ कर दिया है...

बीएमसी चुनाव की घोषणा कभी भी

बृहन्नमुंबई महानगर निगम यानी बीएमसी चुनाव की घोषणा किसी भी समय हो सकती है। पक्ष और विपक्ष दोनों की तैयारियां पूरी हो गई हैं।...

विज्ञान की बड़ी सफलता

नई तकनीक इमारतों या इंसानी बस्तियों पर बिजली गिरने से होने वाले नुकसान को रोकने में मददगार हो सकती है। इस प्रयोग को आसमान...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

रंत रैबार संस्था का करियर काउंसलिंग कार्यक्रम : विद्यार्थियों को मिला मार्गदर्शन, हर क्षेत्र से जुड़े स्कोप के बारे में बताया गया

यमकेश्वर। यमकेश्वर विधानसभा के जनता इण्टर कॉलेज किमसार के सभागार में बच्चों के उज्ज्वल भविष्य एवं मार्गदर्शन के लिए करियर गाइडेंस व काउंसलिग कार्यक्रम हुआ।...

राजस्थान के जैसलमेर जिले से सामने आया चोरी का एक अनोखा मामला, जमकर हो रही चर्चा

राजस्थान। आए दिन चोरी की वारदात होती रहती हैं, लेकिन प्रदेश के जैसलमेर जिले में चोरी का एक अनोखा मामला सामने आया है। जिसकी...

अंकिता हत्याकांड- एक से तीन फरवरी तक होगा वनंतरा रिसार्ट प्रकरण के मुख्य आरोपी पुलकित आर्य का पालीग्राफ टेस्ट

देहरादून। वनंतरा रिसार्ट प्रकरण में मुख्य आरोपित पुलकित आर्य का पालीग्राफ टेस्ट एक से तीन फरवरी तक होगा। दिल्ली के रोहणी स्थित केंद्रीय फोरेंसिक लैब...

मेरठ में गणतंत्र दिवस पर रेलवे रोड क्षेत्र में राष्ट्रगान पर नृत्य करने और अपमान करने वाले एक आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश। मेरठ में गणतंत्र दिवस पर रेलवे रोड क्षेत्र में राष्ट्रगान पर नृत्य करने और अपमान करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।...

सीएम धामी ने भाजपा प्रदेश महिला मोर्चा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में किया प्रतिभाग

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में भाजपा प्रदेश महिला मोर्चा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग...

घुटनों को मजबूती देने में मदद कर सकते हैं ये 5 योगासन, रोजाना करें अभ्यास

उम्र और चोट जैसे कई कारणों से हमारे घुटनों को नुकसान पहुंच सकता है। इन समस्याओं से सुरक्षित रहने के लिए घुटनों को मजबूत...

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में हुआ बड़ा हादसा, वायुसेना का सुखोई-30 और मिराज हुए क्रैश

मध्य प्रदेश। मुरैना जिले के पहाड़गढ़ के जंगल में फाइटर जेट गिरने के बाद आग लग गई। सूचना मिलते ही पुलिस फोर्स पहाड़गढ़ के जंगल...

कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन बीएफ-7 के खतरे के बीच भारत बायोटेक की स्वदेशी इंट्रा नेजल कोरोना वैक्सीन का परीक्षण रहा सफल

हिमाचल प्रदेश। कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन बीएफ-7 के खतरे के बीच भारत बायोटेक की स्वदेशी इंट्रा नेजल कोरोना वैक्सीन केंद्रीय ड्रग्स लेबोरेटरी (सीडीएल) कसौली...

उत्तराखंड पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री ने दी विरोधियों को नसीहत ‘कायदे में रहेंगे तो फायदे में रहेंगे’

देहरादून। मध्य प्रदेश के बाबा बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री उत्तराखंड पहुंचे हैं। सोशल मीडिया पर पोस्ट एक वीडियो में वे बता रहे है...

पुष्पा: द रूल की शूटिंग के लिए ‘द बॉयज’ में शामिल होंगी रश्मिका मंदाना

मशहूर एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना ने 2021 की ब्लॉकबस्टर ‘पुष्पा : द राइज’ के सीक्वल को लेकर अपडेट दिया है। एक्ट्रेस ने शेयर किया कि ‘द...